रिपोर्ट नलिन दीक्षित
राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर एक बार फिर से विवाद सुर्खियों में है। यह मामला इतना संवेदनशील और चर्चित हो गया है कि हर कोई यह जानना चाहता है, कि आखिर पूरा माजरा क्या है।
सोमवार, 24 मार्च 2025 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में इस मुद्दे पर सुनवाई हुई, जिसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए और समय दे दिया।
अगर आप भी इस विवाद के बारे में पूरी जानकारी चाहते हैं और यह समझना चाहते हैं कि दोहरी नागरिकता को लेकर भारत का कानून क्या कहता है, तो यह खबर आपके लिए है। आइए, इस मामले को गहराई से समझते हैं और जानते हैं कि यह क्यों इतना महत्वपूर्ण हो गया है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में जस्टिस एआर मसूदी और जस्टिस एके श्रीवास्तव की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई की यह याचिका कर्नाटक के बीजेपी कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने दायर की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद राहुल गांधी के पास भारत के साथ-साथ ब्रिटेन की नागरिकता भी है। इस दावे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस पर जवाब मांगा था, लेकिन सुनवाई के दौरान सरकार ने और समय की मांग की। इसके बाद हाई कोर्ट ने फैसला लिया कि केंद्र को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए चार हफ्तों का वक्त दिया जाए और इस मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
यह खबर न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के हवाले से सामने आई है, जो इसकी विश्वसनीयता को और मजबूत करती है।
अब सवाल यह उठता है कि राहुल गांधी की नागरिकता पर यह विवाद क्यों और कैसे शुरू हुआ? विग्नेश शिशिर ने अपनी याचिका में कहा है कि उनके पास कुछ ऐसे सबूत हैं, जो यह साबित करते हैं कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं।
उनका दावा है कि यह जानकारी ब्रिटेन सरकार से मिले कुछ गोपनीय ईमेल्स से सामने आई है।
अगर यह सच है, तो यह भारत के कानून के खिलाफ होगा, क्योंकि भारतीय संविधान और नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत किसी भी भारतीय नागरिक को दोहरी नागरिकता रखने की इजाजत नहीं है।