रिपोर्ट नलिन दीक्षित
पालदा न्यू RTO रोड दस सालों से इंतजार कर रही है अपने उद्धार का की कोई तो आएगा जो मेरे इस खराब चेहरे को ठीक करेगा मै नहीं चाहती बदसूरत रहना लोगो गिराना पर मैं मजबूर हूं।।
खुद अपना श्रृंगार नहीं कर सकती
मैं नहीं चाहती लोग गिरते पड़ते जाए मेरे ऊपर मेरे बालक घायल हो
आदर्श रोड मैं भी बनना चाहती हूं ।।
।।पर अब तक सामान्य रोड भी नहीं बन पाई हूं।।
इतने गड्ढे इतनी चोटे लेकर अब जीना मुश्किल हो गया है।
बस कुछ दिनों में दम तोड़ने वाली हूं
।।अंतिम सांसे गिन रही हूँ
जिम्मेदारों(जनप्रतिनिधि)को कहना शोक मनाए मेरी इस हालत का आकार यहां।।
कोई मामूली गांव की रोड नहीं हु मैं सबसे ज्यादा रेवेन्यू देने वाली रोड हूं।
।। सैकड़ों फैक्टरी/ बसे/ RTO/मजदूर /व्यापारी आते जाते है।।
।।विधायक रहवासियों को 41 सेकेंड में बात करके टरकाते है ।।
।।हाथ जोड़े ये उनके आगे खड़े रह जाते है मेरी दशा सुधारने को गुहार लगाते है अपना सा मुंह लेकर वापस घर आ जाते है।।
।।ये मेरी व्यथा आज कल की नहीं मुझे रोते रोते दस साल हो गए।।
।।दस सालों से यही हाल है जनप्रतिनिधि कई आए और चले गए उम्मीद थी कि शायद सीटिंग mla कुछ करेंगे जिनकी सरकार है ।।
।।पर हुआ नहीं कुछ उद्गार मेरा icu में हु अब तो मैं कब मर जाऊं नहीं पता तब आना मेरे उठवाने में संसद विधायक पार्षद सब्जी पूरी खाने।।
अरे पेच वर्क तो वहां होता है जहां रोड हो
।।आशु आ जाए ये व्यथा सुनकर तो सोचो क्या करना है।।